क्या आप जानते हैं ईरान के नतान्ज़ न्यूक्लियर प्लांट में क्या हुआ था? 2009 के आखिर में, IAEA के अधिकारियों ने देखा कि वहाँ पर सेंट्रीफ्यूज अचानक से बहुत तेज़ी से खराब होने लगे थे और उन्हें बदला जा रहा था। ये मशीनें आमतौर पर 10 साल चलती हैं, लेकिन यहाँ तो हज़ारों की संख्या में ये खराब हो रही थीं! IAEA के इंस्पेक्टर हर बार आते और कैमरे से भी निगरानी करते, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर गड़बड़ कहाँ है। उन्हें नहीं पता था कि इसका जवाब प्लांट के कंट्रोल रूम में लगे कम्प्यूटरों में छिपा था। दरअसल, जून 2009 में किसी ने चुपके से एक ऐसा डिजिटल हमला किया था जिसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए वहाँ के सिस्टम में घुसपैठ कर ली थी। यह कोई मामूली वायरस नहीं था। यह दुनिया का पहला डिजिटल हथियार था जिसने डिजिटल युद्ध के एक नए युग की शुरुआत की।

Podden och tillhörande omslagsbild på den här sidan tillhör Kush. Innehållet i podden är skapat av Kush och inte av, eller tillsammans med, Poddtoppen.