शिव पुराण के अध्याय 35 में सप्तऋषियों और देवी अरुंधती द्वारा हिमालय और मैना को समझाने के बाद शिव-पार्वती विवाह का निर्णय लिया जाता है। हिमालय भगवान शिव की महिमा को स्वीकार करते हुए अपनी पुत्री पार्वती को शिवजी की अमानत घोषित करते हैं। सप्तऋषि पार्वती को आशीर्वाद देते हैं और विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
इस अध्याय में जानिए: ✔ भगवान शिव की सर्वोच्च महिमा ✔ हिमालय द्वारा विवाह की स्वीकृति ✔ पार्वती को सप्तऋषियों का आशीर्वाद ✔ शिव-पार्वती विवाह की तैयारी ✔ शुभ विवाह मुहूर्त का निर्धारण
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