भूपेन्द्र जब राजनगर से निकलकर सोनपुर पहुँचा, तो अंधेरे में भटकते हुए उसे प्यास और भूख का सामना करना पड़ा। जब उसने एक घर से पानी माँगा, तो अंदर से बातें अचानक बंद हो गईं और लोग कंबल में छुपने लगे। यह सब देखकर भूपेन्द्र ने समझा कि गाँववाले किसी अनदेखी वजह से डर के मारे ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। जानिए इस रहस्यमयी रात का पूरा रहस्य!"
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