एक ज़माना था तब किसी देश के ताकतवर होने में एक अहम Factor होती थी उसकी Population. जिसकी जितनी Population उसकी उतनी बड़ी आर्मी.. उतने उसके पास काम करने वाले हाथ.. यानि एक बड़ा Asset. लेकिन बदलती दुनिया और बदलती कंडिशन के साथ.. हालात कुछ बदले भी हैं, अब Population हर सिर्फ़ एक Asset या Resource नहीं है. कई बार ये Liability भी है. कई सरकारों के लिए लगातार चिंता का विषय भी बना हुआ है.. ये Population भी अजीब चीज़ हुई है.. जिसके पास कम है.. वो बढ़ाने के लिए पैसा लगाने को तैयार है.. जैसे रूस, साउथ कोरिया.. दूसरी तरफ़ जिनके पास बहुत रहा.. उन्होंने इसे कंट्रोल करने के लिए पैसा लगाया.. जैसे चीन और एक दौर में भारत भी.. और जिन देशों ने अपने एक Asset को मैनेज करना सीख लिया.. उनकी हो गई चांदी..
तो आज पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में Population को ही समझते हैं.. किसी के लिए Asset.. किसी के लिए Liability क्यों हैं? एक तरफ़ लगातार बढ़ती Population लेकिन दूसरी तरफ़ लगातार गिरती Fertility Rate.. चिंता का विषय क्यों है.. ऐसा क्यों है कि कुछ देश इतने भारी है जनसंख्या के लिहाज़ से.. कुछ इतने हल्के क्यों? क्योंकि ये बात वो है जो सड़क से लेकर संसद तक.. घर से लेकर Policy level तक. एक सबसे इंपोर्टेंट फैक्टर है. समझाने के लिए हमारे सामने हैं इन मामलों की एक्सपर्ट पूनम मुतरेजा.. Population Foundation of India नाम के Think Tank की Executive Director. ActionAid International and ActionAid India की Governing Council and Board Member.. National Academies of Sciences, Engineering, and Medicine (Washington DC) की भी मेंबर रहीं. और Grassroot लेवल पर घूम कर इस मुद्दे को समझा…
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