अध्याय 18 गीता सारांश का सार #3 रजनी जी ने बहुत ही अच्छे से उधारण से समझाया🌺भगवान जी ने हमें स्वतंत्र इच्छा दी है तो हमें उसका गलत इस्तेमाल नही करना,हर पल प्रभु से जुड़े रहना है,जैसे मछली पानी के बिना जिंदा नही रहती ऐसे ही हमें हर कर्म में भक्ति को जोड़ना है🌺हमें भगवान की पूजा अर्चना,वंदना करनी है,भगवान जी कहते हैं ऐसा करने से तुम मेरे पास आएंगे ,तो अगर भगवद गीता पढ़ने से कुछ भी समझ नही आ रही ,तो कुछ सोचे बिना मेरी भक्ति में खो जा,मैं तुम्हे हर पाप से मुक्ति दूंगा🌺तो हमें हर तरह के मनोधर्म छोड़ कर प्रभु के शरणागत होना है और अनन्य भाव से सत्संग,सेवा साधना करनी है🌺जो भक्तों को यह ज्ञान बताएगा बह प्रभु के धाम को जायेगा तो हमें उनको यह ज्ञान बिलकुल भी नहीं देना जो भगवान पर विश्वाश नही करते🌺तो अगर हमे प्रभु की शुद्ध भक्ति प्राप्त करनी है तो प्रचार,प्रसार करना है और भक्तों का संग करना है,तो श्रद्धा और विश्वास से भगवद गीता को सुनकर अपने जीवन में उतारना है और निरंतर इस रास्ते पर चलते रहना है🌺यहां पर भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन जैसे भक्त हैं_वहां पर ऐश्वर्य,जीत, दिव्य शक्ति और नीति हमेशा रहती है,ऐसा भगवान कहते हैं🌺तो हमें नित्य निरंतर अपने कर्म करते हुए अंदर से प्रभु से जुड़े रहना है_हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे 🙏🙏🌺बहुत ही मोटिवेटेड रहा आज का सत्संग ,सभी डेवोटी के रिव्यू और भजन सुनकर बहुत आनंद आया👍सभी का दिल से आभार🙏🙏आज के आनंद की जय🙏🙏 श्रीमद् भगवद गीता की जय🙏🙏🌹
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