टेस्टिकुलर कैंसर क्या होता है? यह शरीर के किस हिस्से को प्रभावित करता है? यह कैंसर कितनी आम बीमारी है, खासकर भारत में? किन उम्र के पुरुषों में इसका खतरा ज्यादा होता है?टेस्टिकुलर कैंसर होने के मुख्य कारण क्या हैं? क्या लाइफस्टाइल, जैसे धूम्रपान, शराब, मोबाइल रखना आदि का इससे कोई संबंध है? जिन लोगों में बचपन में अंडकोष नीचे नहीं उतरे इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं? क्या इसमें दर्द होता है या बिना दर्द के भी गांठ बन सकती है? अगर किसी को अंडकोष में सूजन या भारीपन लगे तो क्या तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए? टेस्टिकुलर कैंसर की जांच कैसे की जाती है? क्या घर पर खुद से इसे पहचान सकते हैं? अगर हाँ, तो कैसे? कौन-कौन से टेस्ट जरूरी होते हैं? इसका इलाज कैसे किया जाता है? सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन? अगर एक अंडकोष निकालना पड़े तो क्या सामान्य जीवन पर असर पड़ता है? इलाज के बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है या यह दोबारा लौट सकता है? क्या टेस्टिकुलर कैंसर का असर फर्टिलिटी पर पड़ता है? इलाज के बाद सेक्स लाइफ पर कोई असर पड़ता है? क्या इलाज से पहले स्पर्म फ्रीज करवाना एक अच्छा विकल्प है? क्या टेस्टिकुलर कैंसर से बचाव संभव है? पुरुषों को कितनी बार self-examination करना चाहिए? किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? क्या टाइट अंडरवियर पहनने से कैंसर का खतरा बढ़ता है? क्या यह सिर्फ बुजुर्गों को होता है या युवाओं में भी आम है? क्या चोट लगने से टेस्टिकुलर कैंसर हो सकता है? इस बीमारी के साथ मानसिक रूप से कैसे डील करें? क्या मरीजों को शर्म या झिझक की वजह से इलाज में देरी होती है? परिवार और पार्टनर की क्या भूमिका होनी चाहिए? ऐसे सभी सवालों के जवाब जानिए Indraprastha Apollo Hospital के यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हर्षित गर्ग से.
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